मैकलुस्कीगंज (लपरा), एंगलो इंडियन के नाम से मशहूर झारखंड की राजधानी रांची से लगभग साठ किलोमीटर दूर मिनी इंग्लैंड कहे जाने वाले मैक्लुस्कीगंज में लॉक डाउन के बाद से अनलाक वन तक जो सुविधाएं सामाजिक संगठनों के माध्यम से राजनीतिक नेता, सांसद ,विधायकों के माध्यम से जरूरतमंदों तक पहुंचना चाहिए था वह पहुंचने में कहीं ना कहीं कुछ देर हुआ ।

हालांकि जिला प्रशासन के द्वारा राशन डीलर के माध्यMम से जरूरतमंदों को राशन उपलब्ध कराया गया। लेकिन जब इसकी जानकारी बिंदराई इंस्टीट्यूट फ़ॉर रिसर्च स्टडी एंड एक्शन (बिरसा) को हुई तो इनके के तत्वावधान में लपरा पंचायत के बिरहोर टोला बिरहोर समुदाय सहित आदिवासी एवं मूल वासियों को संस्था के माध्यम से सूखा राशन वितरण किया गया। इसमें में हर वर्ग हर समुदाय के जरूरतमंदों को चावल , आटा ,सोयाबीन और दाल उपलब्ध कराया गया ।

जिसमें बिरोह टोला ,धुर्वा मोड़ ,बुध बाजार, समेत कई गांवों में सूखा राशन का वितरण किया गया। राशन वितरण कार्य में बिरसा के उमेश नज़ीर, एएवाईएफ के अजय कुमार सिंह, इप्टा, रांची के परवेज़ कुरैशी, लपरा पंचायत की मुखिया पुतुल देवी, मुफ़्ती अब्दुल्ला अजहर काशमी समेत कई लोगों की अहम भूमिका थी।

इस मौके पर बिरसा के सांगठनिक सचिव पुनीत मिंज ने कहा कि कोरोना के चलते हुए लॉकडाउन के कारण आदिवासी-दलित समुदायों के समक्ष भुखमरी की स्थिति पैदा हो गयी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा राहत कार्य संचालित हो रहा है। परंतु यह स्थिति इतनी व्यापक है कि सरकार के राहत पैकेज कई लोगों को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। ऐसे लोगों तक पहुंचना हमारा दायित्व है।

इस कार्य में स्थानीय लोगों में राजेश मुंडा, अनीता देवी वार्ड सदस्य, अनिल साहू ,एतवा बिरहोर, बिरजू बिरहोर, राजू प्रजापति, रोहित ,जितेंद्र गिरी, माशूक कुरैशी इत्यादि उपस्थित थे।

