प्रो शीन अख्तर डोरंडा कब्रिस्तान में किए गए सुपुर्द ए खाक

रांची ने एक बहुत बड़ा विद्वान खो दिया: मौलाना तहजिबुल हसन रिज़वी


रांची: रांची विश्वविद्यालय के पूर्व कार्यकारी कुलपति, और उर्दू साहित्य के आलोचक एवं कथाकार, राष्ट्पति अवार्ड से सम्मानित प्रोफेसर शीन अख्तर डोरण्डा ईदगाह कब्रिस्तान मे सुपुर्द ए खाक किए गए। नमाज़ जनाज़ा झारखंड राज्य हज कमिटी के सदस्य सह मस्जिद ए जाफरिया रांची के इमाम व खतीब हजऱत मौलाना हाजी सैयद तहजीबुल हसन रिज़वी ने प्रातः 10:40 बजे पढ़ाई। इस समय प्रो शीन अख्तर के दोनो नाती अदनान और उनके भाई नमाज ए जनाज़ा में शरीक रहे। धार्मिक विधि विधान के साथ ठीक प्रातः ग्यारह बजे उन्हे डोरंडा ईदगाह कब्रिस्तान में सुपुर्द ए खाक किया गया। नमाज ए जनाज़ा और सुपुर्द ए खाक के समय रांची विश्वविद्यालय स्नातकोत्तर उर्दू विभाग के प्रोफेसर सह मक़बूल समाजसेवी प्रो रिजवान अली अंसारी,श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के डाॅ एस एम अब्बास, मशहूर सामाज सेवी और बिल्डर फसीह अहमद, विनोबा भावे विश्वविद्यालय के प्रोफेसर वकील रिजवी, क़ासिम अली, इक़बाल फात्मी, डाॅ हिदायतुल्लाह, पत्रकार मोहम्मद आदिल रशीद, मोहम्मद इम्तियाज, शब्बीर अहमद,एस एम फासी, आमोद अब्बास, सैयद फ़राज अब्बास, सैयद समर अली, मोहम्मद दानिश, हमारा प्रेस के मालिक मोहम्मद मंसुर, सैयद फ़राज़ अहमद, सीनियर कांग्रेसी लीड़र सैयद हसनैन ज़ैदी, अकिलुर्रह्मान, सोहैल सईद, के अतिरिक्त दर्जनो लोगों ने उन्हे सुपुर्द ए खाक किया। इज़हार ताज़ियत करने वालो में झारखंड के मशहूर अलीम दीन हज़रत मौलाना सैयद मूसवी रज़ा, सैयद जावेद हुसैन, मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी, हाजी रउफ़ गद्दी, मोहम्मद फ़ारूक़, एजाज गद्दी, मुफ़्ती कमर आलम, शाह उमेर, सैयद नेहाल अहमद, मुफ़्ती अब्दुल्ला अज़हर, हाजी माशूक़, हाजी हलीम, राशीद इमरान, डॉ शहबाज़ आलम, डॉ एम हसनैन समेत दर्जनों लोग है।
रांची ने एक बहुत बड़ा विद्वान खो दिया
हजरत मौलाना सैयद तहजिबुल हसन रिज़वी ने नम आंखों से कहा कि आज रांची ने एक बहुत बड़ा विद्वान खो दिया है। वो शख्स नही शख्सियत थे। और यह कहा जाए तो गलत न होगा कि झारखंड के उर्दू अदब का एक सुतून ध्वस्त हो गया। जिसकी भरपाई मुमकिन नही हैं।