या ग़ौस मेरी बिगड़ी एक बार बना जाना


थड़पखना में महफ़िल गौसिया का आयोजन

रांची: जिस तरह नबियों में सबसे आला मक़ाम पैग़म्बर इस्लाम हजऱत मोहम्मद सल्ल. का है उसी तरह वलियों में सबसे आला मक़ाम ग़ौसे आज़म का हैं। जिसने हजऱत मोहम्मद सल्ल के चटाई में आगया, साथ मे आगया और वह कोई नेकी किये बगैर मर गया तो वह जन्नत में जाएगा। उक्त बातें मुजफ्फरपुर के मौलाना मुफ़्ती अख्तर क़ादरी ने कही। वह बुधवार को स्वर्गीय हाजी शमीम अख्तर हबीबी के आवास पर समाजसेवी मोइज अख्तर भूलू की अध्यक्षता में महफ़िल गौसिया को सम्बोधित कर रहे थे। मुफ़्ती अख्तर उल कादरी ने कहा कि नबी का फरमान है जो मेरी कब्र की जियारत करेगा, उस पर मेरी शफाअत वाजिब है। अमल के साथ ईमान पर होना जरूरी है। अपने माता पिता की इज्जत करो उन्हें कोई तकलीफ न दो। और अगर मां-बाप जिंदा नहीं है तो उनके कब्र की जियारत करो, इस ज़ियारत में अल्लाह ने नेकी रखा हैं। महफिल गौसिया का संचालन करते हुए हजरत मौलाना मुजीब उर रहमान ने जब पढ़ा कि, या गौस मेरी बिगड़ी एक बार बना जाना, मझधार में है नैय्या बस पार लगा जाना, कब्र में फरिश्ते जब आएंगे तो कह देना, हरगिज़ ना उसे छेड़ो है गौस का दीवाना। तो लोग झूम उठे और नारे तकबीर से महफ़िल गूंज उठा। वहीं हजऱत मौलाना डॉ ताजुद्दीन ने अपने सम्बोधन में कहा कि आज सबसे ज्यादा जरूरी है अल्लाह के वलियों से क़ुरबत (मोहब्बत)पैदा करना। अमल थोड़ा भी हो तो चलेगा, लेकिन ईमान का होना जरूरी है। वहीं जब अब्दुल मुबीन नाज़िश ने पढ़ा के हक़ तआला का प्यारा है बगदाद में, पंजतन का दुलारा है बगदाद में, जिसके दर से वली को विलायत मिली, वह विलायत का तारा है बगदाद में, सारी दुनिया में शोहरत है जिस पीर की, पीर ऐसा हमारा है बगदाद में। महफ़िल गौसिया का समापन्न मुफ़्ती अख्तरुल क़ादरी के दुआ पर हुई। दुआ के बाद मोइज अख्तर भोलू के द्वारा लंगर ख़्वानी हुआ। मौके पर एदारा ए शरिया झारखंड के नाज़िम आला हजरत मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी, सेंट्रल मुहर्रम कमिटी के महासचिव अकिलुर्रह्मान, हाफिज लुकमान, हाफिज एहतेशाम, शादाब अख्तर, नदीम आलम, अफरोज आलम, फिरोज आलम, हबीब अख्तर उर्फ सोनू, मजहर अली सिद्दीकी, झलन भाई, मोहम्मद जावेद, पत्रकार शफीक अंसारी, मोहम्मद कलीम, मीर अनवर, सादिक, मोहम्मद पिंकू। समेत कई लोग मौजूद थे।