
रांची: झारखंड राज्य हज कमिटी के सदस्य सह ऑल इंडिया शोहरत याफ्ता आलिम दिन सह मस्जिद जाफरीया रांची के इमाम व खतीब हजरत मौलाना हाजी सैयद तहजिबुल हसन रिज़वी ने बकरीद पर अपने पैगाम में लोगो को सम्बोधित करते हुए कहा कि ईद ए कुर्बान कुर्बानी का त्यौहार इंसानियत को परवान चढ़ाने के लिए कुर्बानी का जज्बा पैदा करता है। जानवर की कुर्बानी देना उस वक्त तक कामयाब नहीं हो सकता जब तक इंसान अपने गरुर और घमंड को हमेशा हमेशा के लिए खत्म ना कर दे। ईद उल अजहा का पर्व भाईचारगि की पहचान है। जानवर की बलि से पहले हमें अपने मन में बसे शैतान को निकाल फेंकना होगा, तब जाकर हमारी दी हुई कुर्बानी काबुल की जाएगी। बकरा ईद बकरे की कुर्बानी देने का नाम नहीं हैं बल्कि सुन्नत इब्राहिम पर अमल करने का और मनाने का नाम है। इस कुर्बानी से हर बेटे को सीख लेना चाहिए की हजरत इब्राहीम ने अपने लख्त जिगर बेटे को अपना सपना बताया और बेटे ने बाप की आवाज पर लब्बेक कहकर बाप के हुक्म का कहना मान अपनी कुर्बानी देने पर राजी हो गए, और अपने अल्लाह को भी राजी कर लिया। इससे पता चलता है कि मां-बाप की रजा में भी अल्लाह की रजा पाई जाती है।